गाँव से पैसा आता है, बैंक दूर है, अंगूठा लगते ही राशि मिल जाती है। सुविधा ठीक है, लेकिन नंबर पूछने वाले फोन भी बढ़ गए हैं। बैंक वाले बनकर OTP माँगते हैं — असली बैंक ऐसा नहीं करता।
निकासी से पहले
अपना आधार, बैंक का नाम, और कितने पैसे निकालने हैं — तीन बातें साफ बताओ। अंगूठा सूखा हो तो पोंछ लो। गीला या फटा अंगूठा तीन बार फेल होता है, फिर कार्ड दिन भर अटक सकता है।
रसीद दो बार मत फेंको
सफल और असफल दोनों रसीद रखो। असफल पर पैसा कट गया दिखे तो उसी दिन दुकान पर बोलो। महीना बीतने पर बैंक से पूछना लंबा पड़ता है।
धोखा कैसे होता है
कॉल आती है — KYC पेंडिंग है, OTP बताओ। OTP मत बताना। कोई तुम्हारे पीछे खड़ा होकर PIN देखे तो हाथ से ढकना। दुकान पर अपनी राशि ज़ोर से मत चिल्लाना।
लिमिट
एक दिन में कितनी निकासी हो सकती है, बैंक तय करता है। बड़ी राशि के लिए पासबुक और बैंक जाना पड़ सकता है। ई-मित्र छोटी-मझोली जरूरत के लिए है, सारे बचत खाते का विकल्प नहीं।

